Saturday, August 2, 2008

भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति की बदलती अवधारणाएं -
  1. संस्कृति के बदलते रूप -
    आज के समय में विश्व की सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वप्रतिष्ठित संस्कृति, भारतीय संस्कृति का रूप एवं उसके आचार-विचार काफी हद तक बदल चुके हैं और दिन पर दिन तेजी से बदलते जा रहे हैं|विश्व की सर्वोच्च संस्कृति दिनों दिन तेजी से पतन की ओर बढ़ रही है और हमारा सभ्य समाज इसके विषय में चिंतित होने और इसे बचाने के लिए कदम उठाने के स्थान पर इसे "माडर्न सोसाइटी" की संज्ञा देकर इसे और बढ़ावा देता जा रहा है| यहाँ तक कि कुछ लोग तो इस "माडर्न सोसाइटी" का हिस्सा बनने के लिए और इसमें शामिल होने के लिए आंख बंद करके इसका अनुकरण करने लगते हैं|
  2. प्रमुख कारण -
    इस तेजी से इस संस्कृति के अधोगति की और जाने के वैसे तो अनेकों कारण हैं पर मुख्यतया इसमें अधिक से अधिक धन कमाने की चाहत, अधिक से अधिक सुख सुविधाओं को भोगने की चाहत है जिसके लिए आज के टी.वी चैनल तथा माता पिता की अपने बच्चों से बढती अपेक्षाएं आदि सर्वाधिक जिम्मेदार हैं|ये अपेक्षाएं भी उसके एक अच्छे इंसान बनने से ज्यादा उसके अधिक कामयाब इन्सान बनने की होती हैं| बच्चे अपने माता पिता की इन अपेक्षाओं को पूरा करने में ये समझ ही नहीं पाते की उनका रास्ता ग़लत है या सही|माता पिता भी उनकी उपलब्धियों के अलावा और कुछ देखना या सोचना भूल ही जाते हैं| टी.वी चैनलों पर दिखाए जा रहे कार्यक्रमों में भी हमारी संस्कृति और सभ्यता की खुले आम धज्जियाँ उडाई जाती हैं और लोग उन्हें बड़े प्रेम से देखते हैं और यहाँ तक कि उनके आदर्श बताये जा रहे चरित्रों को ही अपना आदर्श मान भी लेते हैं| वे आदर्श चरित्र लोगों पर इस कदर हावी हो जाते हैं कि वे जो भी करें वह लोगों को सही ही लगता है| एक व्यक्ति कितने ही लोगों से शादी कर सकता है, जब चाहे शादी कर सकता है, उसके बच्चों के बच्चों की भी शादियाँ हो चुकी हों पर फ़िर भी वह दूसरी, तीसरी, चौथी शादी कर सकता है| धन-दौलत, जमीन-जायदाद के लिए कोई अपने भाई, बहन, पति, पत्नी, माता, पिता किसी की भी हत्या कर सकता है और फ़िर भी वह हमेशा जीतता रहता है, सुखी रहता है| हमारी संस्कृति की सदैव बुराई पर अच्छाई की विजय, अधर्म पर धर्म की विजय जैसी बातों को तो मानो वह जानते ही नहीं, यह सब उन्होंने कभी सुना ही नहीं या फ़िर उन्हें इस पर विश्वास नहीं है| वह आज दुनिया को यही बताना चाहते हैं की अच्छाई बुराई, धर्म अधर्म जैसी कोई चीज़ नहीं होती| मनुष्य को केवल अपने बारे में सोचना चाहिए और अधिक से अधिक धन कमाने, भौतिक सुख सुविधाओं को इकट्ठा करने में लगे रहना चाहिए और इसके लिए उन्हें धोखा, झूठ, चोरी और यहाँ तक कि किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करना चाहिए|
  3. संस्कृति रक्षा के उपाय - मेरा मानना है कि हमें अपनी प्राचीन एवं सुसंस्कृत संस्कृति को बचाने के लिए गंभीरता से सोचना चाहिए तथा इस दिशा में शीघ्रातिशीघ्र ठोस कदम उठाने चाहियें|
  4. संभावनाएं -

2 comments:

Neo said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

I completely agreed to u and really want to do something for this.I have some ideas also, can we discuss them. I want to share these ideas with all the persons who r interested in this way.
I also heartly congratulate u to take a step in this matter.